रविवार, 12 सितंबर 2010

दीपक बुझाने वाले रहते हैं हमेशा गरीब

हते हैं कि समय के साथ ही इंसान को बदलते रहना चाहिये, तथा पुरानी और अनावश्यक बातों को छोड़ देना चाहिये। किन्तु यहां ऐसा करते समय इंसान को बड़ी सावधानी तथा चौकन्ना रहने की जरूरत होती है।

आंख मीचकर हर नई चीज को गले लगा लेना और पुराना कहकर हर बात को ठुकरा देना, दोनों ही बातों में बराबर का खतरा है। पुरानी परंपराओं या मान्यताओं में हो सकता है कुछ समय के साथ अनावश्यक और बेकार हो गई हों, किन्तु कुछ परंपराएं ऐसी हैं जो सैकड़ों हजारों साल गुजरने के बावजूद आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण और कारगर हैं।

इन परंपराओं और मान्यताओं के पीछे गहरा विज्ञान छुपा होता है। ऐसी ही एक महत्वपूर्ण परंपरा है कि, व्यक्ति को कभी भी देव स्थान पर जलते हुए दीपक को नहीं बुझाना चाहिये। आखिर क्या कारण है कि जलते हुए दीपक को बुझाने से इंसान को सदा दरिद्र यानि कि गरीब ही रहना पड़ता है? आइये जाने उन कारणों को:-

- धन की देवी लक्ष्मी और धन के राजा देवता कुबेर दोनों की ही आराधना में दीपक का प्रमुख स्थान होता है। बगैर दीपक के दोनों की ही पूजा- आराधना अधूरी मानी जाती है।

- ज्योतिष मे भी ऐसी मान्यता है कि जलते हुए दीपक को बुझाने से सारे ग्रह-नक्षत्र इंसान के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। खासकर देवता सूर्य सबसे ज्यादा असर डालते हैं।

1 टिप्पणी:

honesty project democracy ने कहा…

ये सब बातें इमानदार और इंसान पर लागू होता है ,बेईमान और भ्रष्टाचारियों से सभी ग्रह,नक्षत्र और सूर्य का प्रतिकूल प्रभाव दूर भागतें हैं | आज सबसे बड़ा ग्रह का प्रतिकूल प्रभाव का कारण है ईमानदारी को अपनाना और इंसानी संवेदना को व्यवहार में रखना | शर्मनाक स्थिति है ...

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