मंगलवार, 24 नवंबर 2009

रसोईघर का वास्तु - डॉ. श्रीकृष्ण

रसोई को घर के आग्नेय कोण (पूर्व-दक्षिण) में बनाना चाहिए क्योंकि इसे ही अग्नि का स्थान माना गया है। यहां रसोई होने से अग्नि देव नित्य प्रदीप्त रहते हैं और घर का संतुलन बना रहता है। किंतु, इससे यह भी देखा गया है कि अक्सर दिन में तीन या उससे अधिक बार भोजन बनता है यानी खर्च बना ही रहता है।
ऐसे में एकदम अग्निकोण को छोड़कर पूर्व की ओर रसोई बनाएं। यदि पूर्व की रसोई बनी हुई हो तो चूल्हे को थोड़ा पूर्व की ओर खिसका दें। चूल्हा इस तरह लगाएं कि सिलेंडर भी उसके एकदम नीचे रहे। रसोई तैयार करते समय मुख की स्थिति पूर्व में रहनी चाहिए।
यह भी ध्यान रखें कि यदि रसोई के दक्षिण में एग्जॉस्ट फैन हो तो व्यय की संभावना रहती है। ऐसे में पूर्व की दीवार पर एग्जॉस्ट फैन लगाना चाहिए। रसोई बन जाने के बाद भोजन कभी घर के ब्रrास्थान पर बैठकर नहीं करें। न ही वहां पर झूठा डालें।
इससे रसोई का खर्च बढ़ता है और घर में अनर्गल वार्तालाप भी बढ़ता है। भोजन कभी वायव्य कोण में बैठकर या खड़े-खड़े भी नहीं करें। इससे अधिक खाने की आदत हो जाती है। इसी तरह नैऋत्य कोण में बैठकर भोजन नहीं करें। यह राक्षस कोना है और इससे पेटू हो जाने की आशंका रहती है।
रसोई घर के लिए जरूरी टिप्स.. 1. रसोई घर में अन्नपूर्णा या लक्ष्मीजी का चित्र लगाना चाहिए और रसोई बनाने से पूर्व चित्र पर अगरबत्ती लगानी चाहिए। 2. भोजन बनाकर खाने से पूर्व एकाध कौर आग की ज्वाला में अर्पित कर दें। 3. भोजन करने के बाद एक कौर हर हाल में टिफिन में बचाकर रखें। 4. अपने हाथों से एक रोटी गाय को अवश्य दें। यदि द्वार पर श्वान बैठता हो तो उसे भी रोटी से संतुष्ट करें। 5. यदि भोजन की सामग्री रसोई घर में ही रखी जाती हो तो उसे हटा दें और दक्षिण दिशा में रखने का प्रबंध करें। 6. रसोई को व्यवस्थित रूप से तैयार करें और कम समय के लिए ही एग्जॉस्ट फैन चलाएं।

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