कई बार जब आप कोई नया उद्योग, धंधा स्थापित करते हैं लेकिन अथक परिश्रम करने के बाद भी उसमें आपको मनचाहा मुनाफा नहीं मिल पाता है। ऐसा वास्तुदोष के कारण होता है। हम आपको बताते हैं फैक्ट्री में वास्तुदोष से निजात पाने के कुछ आसान उपाय -
फैक्ट्री में तैयार माल हमेशा वायव्य कोण में रखें। ऐसा करने से आपका माल शीघ्र बिक जाएगा।
तैयार माल को ले जाने के लिए गाड़ियों की पार्किंग पूर्व या उत्तर दिशा में करना श्रेष्ठ है।
फैक्ट्री या उद्योग भवन के प्रवेश द्वार के आगे बिजली या टेलीफोन का खंभा होना अशुभ होता है।
फैक्ट्री में भारी मशीनें हमेशा नैऋत्य कोण में रखी जानी चाहिए।
फैक्ट्री मालिक का हमेशा बीमार व परेशान रहना भी उसके व्यवसाय को प्रभावित करता है।
सौजन्य से - डायमंड कॉमिक्स प्रकाशन लि।
सोमवार, 21 मार्च 2011
वास्तु टिप्स
कई बार हम बहुत सी छोटी-मोटी गलतियाँ कर बैठते हैं तथा इस वजह से गलत दिशा में सामान रखने के कारण हमारे घर-परिवार में सुख-शांति छिन जाती है। वास्तु में दिशाओं का बड़ा महत्व है इसलिए घर में कोई भी सामान रखने से पहले यह जान लेना आवश्यक है कि उस सामान को किस दिशा में रखा जाना चाहिए।
वास्तु टिप्स :
शयनकक्ष में झाडू न रखें। तेल का कनस्तर, अँगीठी आदि न रखें। व्यर्थ की चिंता बनी रहेगी। यदि कष्ट हो रहा है तो तकिए के नीचे लाल चंदन रख कर सोएँ।
यदि दुकान में चोरी होती है तो दुकान की चौखट के पास पूजा करके मंगल यंत्र स्थापित करें।
दुकान में मन नहीं लगता तो श्वेत गणपति की मूर्ति विधिवत पूजा करके मुख्य द्वार के आगे और पीछे स्थापित करना चाहिए।
यदि दुकान का मुख्य द्वार अशुभ है या दक्षिण पश्चिम या दक्षिण दिशा में है तो ‘यमकीलक यंत्र' का पूजन करके स्थापना करें।
यदि सरकारी कर्मचारी द्वारा परेशान हैं तो सूर्य यंत्र की विधिवत पूजा करके दुकान में स्थापना करें।
वास्तु टिप्स :
शयनकक्ष में झाडू न रखें। तेल का कनस्तर, अँगीठी आदि न रखें। व्यर्थ की चिंता बनी रहेगी। यदि कष्ट हो रहा है तो तकिए के नीचे लाल चंदन रख कर सोएँ।
यदि दुकान में चोरी होती है तो दुकान की चौखट के पास पूजा करके मंगल यंत्र स्थापित करें।
दुकान में मन नहीं लगता तो श्वेत गणपति की मूर्ति विधिवत पूजा करके मुख्य द्वार के आगे और पीछे स्थापित करना चाहिए।
यदि दुकान का मुख्य द्वार अशुभ है या दक्षिण पश्चिम या दक्षिण दिशा में है तो ‘यमकीलक यंत्र' का पूजन करके स्थापना करें।
यदि सरकारी कर्मचारी द्वारा परेशान हैं तो सूर्य यंत्र की विधिवत पूजा करके दुकान में स्थापना करें।
लेबल:
वास्तु
रविवार, 20 मार्च 2011
घर को बुरी नजर से बचाने के लिए क्या करें?
क्या आप नए घर या फ्लेट में प्रवेश करने जा रहे है? और आप ये चाहते हैं कि नए घर में आपका परिवार खुशी व आनंद से रहे। ऐसा सिर्फ तभी संभव है जब आपका घर हर तरह की नकारात्मक ऊर्जाओं और बुरी नजर से सुरक्षित रहे । अपने घर को आप यदि बुरी नजर से बचाना चाहते हैं तो नीचे लिखे उपाय करें-
- नए घर को बुरी नजर से बचाने के लिए शुक्रवार को अशोक वृक्ष के पत्तों को धागे या पतली सूत से बांध कर बंदरवाल बना लें। इन पत्तों पर लाल चन्दन या सिन्दूर से गं नामक गणेश जी का बीज मंत्र लिख दें।
- मंत्र लिखने के बाद इस बंदरवाल को घर के मुख्य द्वार पर इस प्रकार बांध दें कि हर व्यक्ति इसके नीचे से घर में प्रवेश करे। ऐसा करने से बुरे विचार या नकारात्मक ऊर्जा का नाश हो जायेगा व भवन पर शुभ प्रभाव पड़ेगा।
- अपने भवन के दक्षिण हिस्से में सबसे ऊपर केसरिया रंग के कपड़े की झंडी लगाना चाहिए। इसे मंगलवार के दिन लगाना चाहिए। ऐसा करने से घर आकस्मिक, विपदा, कलह इत्यादि से बचा रहता है।
- अपने भवन को बुरी नजर, बुरे प्रभाव, नकारात्मक उर्जा से बचाने हेतु भवन के मुख्य द्वार के दोनों पिलरों(खंबों) पर स्वास्तिक का चिन्ह, बेल-बुटे, नाचते मोर, गाय- बछड़े आदि शुभचिह्न जरुर बनाएं।
इन उपायों को अपनाने से आपका नया घर हमेशा बुरी नजर से बचा रहेगा।
- नए घर को बुरी नजर से बचाने के लिए शुक्रवार को अशोक वृक्ष के पत्तों को धागे या पतली सूत से बांध कर बंदरवाल बना लें। इन पत्तों पर लाल चन्दन या सिन्दूर से गं नामक गणेश जी का बीज मंत्र लिख दें।
- मंत्र लिखने के बाद इस बंदरवाल को घर के मुख्य द्वार पर इस प्रकार बांध दें कि हर व्यक्ति इसके नीचे से घर में प्रवेश करे। ऐसा करने से बुरे विचार या नकारात्मक ऊर्जा का नाश हो जायेगा व भवन पर शुभ प्रभाव पड़ेगा।
- अपने भवन के दक्षिण हिस्से में सबसे ऊपर केसरिया रंग के कपड़े की झंडी लगाना चाहिए। इसे मंगलवार के दिन लगाना चाहिए। ऐसा करने से घर आकस्मिक, विपदा, कलह इत्यादि से बचा रहता है।
- अपने भवन को बुरी नजर, बुरे प्रभाव, नकारात्मक उर्जा से बचाने हेतु भवन के मुख्य द्वार के दोनों पिलरों(खंबों) पर स्वास्तिक का चिन्ह, बेल-बुटे, नाचते मोर, गाय- बछड़े आदि शुभचिह्न जरुर बनाएं।
इन उपायों को अपनाने से आपका नया घर हमेशा बुरी नजर से बचा रहेगा।
लेबल:
ज्योतिष
गुरुवार, 16 दिसंबर 2010
सोमवार को शिवजी का दिन क्यों हैं?
जीवन की हर समस्या का शिवजी की पूजा आसानी से हल हो सकती है। इनकी पूजा के लिए कोई विशेष दिन या मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती। फिर भी कई विद्वानों द्वारा शिव पूजा के लिए सोमवार का दिन श्रेष्ठ माना गया है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सोमवार चंद्र देव का दिन माना गया है। कुंडली में चंद्र का महत्वपूर्ण स्थान है। चंद्र के आधार पर ही हमारी जन्म राशि का निर्धारण होता है। यदि जन्म कुंडली में चंद्र से संबंधित कोई दोष हो तो सोमवार के दिन शिवजी के पूजन से वह दोष शांत हो जाता है। शिव को शशिधर भी कहा जाता है क्योंकि शिवजी ने चंद्र को अपने मस्तक पर धारण कर रखा है।
शास्त्रों के अनुसार सभी देवी-देवताओं की पूजा के लिए अलग-अलग विशेष दिन निर्धारित किए गए हैं। सोम शब्द का अर्थ होता है चंद्रमा। चंद्रमा को चंचल ग्रह माना गया है, साथ ही यह हमारे मन का नियंत्रक भी है। चंद्र को शिव ने मस्तक पर स्थान दिया है अर्थात् शिव सच्चे मन से उनकी आराधना करने वाले श्रद्धालु को अपने मस्तक पर चंद्र के समान सुशोभित करते हैं। इस बात का मतलब यही है वे भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। भगवान अपने भक्तों के अधिन माने गए हैं।
शिवजी का सोमवार से सीधा संबंध है। सोम शब्द में ऊँ शब्द भी विद्यमान है। ऊँ शिवजी का ही प्रतीक है। सोमवार, चंद्रमा और शिवजी इन तीनों का आपस में गहरा संबंध है। इसी वजह से प्राचीनकाल से ही सोमवार को शिवजी का दिन माना जाता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सोमवार चंद्र देव का दिन माना गया है। कुंडली में चंद्र का महत्वपूर्ण स्थान है। चंद्र के आधार पर ही हमारी जन्म राशि का निर्धारण होता है। यदि जन्म कुंडली में चंद्र से संबंधित कोई दोष हो तो सोमवार के दिन शिवजी के पूजन से वह दोष शांत हो जाता है। शिव को शशिधर भी कहा जाता है क्योंकि शिवजी ने चंद्र को अपने मस्तक पर धारण कर रखा है।
शास्त्रों के अनुसार सभी देवी-देवताओं की पूजा के लिए अलग-अलग विशेष दिन निर्धारित किए गए हैं। सोम शब्द का अर्थ होता है चंद्रमा। चंद्रमा को चंचल ग्रह माना गया है, साथ ही यह हमारे मन का नियंत्रक भी है। चंद्र को शिव ने मस्तक पर स्थान दिया है अर्थात् शिव सच्चे मन से उनकी आराधना करने वाले श्रद्धालु को अपने मस्तक पर चंद्र के समान सुशोभित करते हैं। इस बात का मतलब यही है वे भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। भगवान अपने भक्तों के अधिन माने गए हैं।
शिवजी का सोमवार से सीधा संबंध है। सोम शब्द में ऊँ शब्द भी विद्यमान है। ऊँ शिवजी का ही प्रतीक है। सोमवार, चंद्रमा और शिवजी इन तीनों का आपस में गहरा संबंध है। इसी वजह से प्राचीनकाल से ही सोमवार को शिवजी का दिन माना जाता है।
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धर्म