रविवार, 12 सितंबर 2010
टोटके : क्या आप चाहते हैं लहलहाते बाल
तंत्र शास्त्र में कई ऐसे टोटके हैं जिसके जरिए हम खुबसूरत बाल पा सकते हैं, बालों का झड़ना रोक सकते हैं।
अगर आपके बाल बहुत ज्यादा झड़ते हैं तो एक प्रयोग हम आपको बता रहे हैं। यह सिद्ध प्रयोग है और इसके करने से निश्चित ही आपको लाभ भी मिलेगा।
बाजार से एक मोती शंख खरीद लें। एक दिन पहले इसमें साफ पानी भरकर रख लें। इस पानी में बाहरी धूल-मिट्टी न लगने पाए। अगले दिन इस पानी को अपने बालों में तेल की तरह लगाएं और सूखने दें। पानी लगाते समय इस मंत्र का जाप करें :
।। ऊँ ह्रीं ह्रीं श्रीं ह्रीं ह्रीं ऊँ।।
इसके बाद अपना सिर धो लीजिए। थोड़े दिन यह प्रयोग करने से ही आपको अपने बालों में फर्क महसूस होने लगेगा।
शनिवार, 17 जुलाई 2010
अंग फड़कना भी होता है शुभ-अशुभ
नीचे विभिन्न अंगों के फड़कने के फलादेश दिए गए हैं-
सिर के अलग-अलग हिस्सों के फड़कने का भिन्न-भिन्न अर्थ होता है जैसे- मस्तक फड़कने से भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। कनपटी फड़के तो इच्छाएं पूर्ण होती है। दाहिनी आंख व भौंह फड़के तो समस्त अभिलाषा पूर्ण होती है। बांई आंख व भौंह फड़के तो शुभ समाचार मिलता है। दोनों गाल यदि फड़के तो अतुल धन की प्राप्ति होती है। यदि होंठ फडफ़ड़ाएं तो हितैषी का आगमन होता है। मुंह का फड़कना पुत्र की ओर से शुभ समाचार का सूचक होता है। यदि लगातार दाहिनी पलक फडफ़ड़ाए तो शारीरिक कष्ट होता है।
हाथ के विभिन्न हिस्सों का फड़कना
दाहिनी ओर का कंधा फड़के तो धन-संपदा मिलती है। बांई ओर का फड़के तो सफलता मिलती है और यदि दोनों कंधे फड़कें तो झगड़े की संभावना रहती है। हथेली में यदि फडफ़ड़ाहत हो तो व्यक्ति किसी विपदा में फंस जाता है। हाथों की अंगुलियां फड़के तो मित्र से मिलना होता है। दाईं ओर की बाजू फड़के तो धन व यश लाभ तथा बाईं ओर की बाजू फड़के तो खोई वस्तु मिल जाती है। दाईं ओर की कोहनी फड़के तो झगड़ा होता है, बाईं ओर की कोहनी फड़के तो धन की प्राप्ति होती है।
शरीर के मध्य भागों का फड़कना
पीठ फड़के तो विपदा में फंसने की संभावना रहती है। दाहिनी ओर की बगल फड़के तो नेत्रों का रोग हो जाता है। पसलियां फड़के तो विपदा आती है। छाती में फडफ़ड़ाहट मित्र से मिलने का सूचक होती है। ह्रदय का ऊपरी भाग फड़के तो झगड़ा होने की संभावना होती है। नितंबों के फड़कने पर प्रसिद्धि व सुख मिलता है।
पैर के विभिन्न हिस्सों का फड़कना
दाहिनी ओर की जांघ फड़के तो अपमान होता है, बाईं ओर की फड़के तो धन लाभ होता है। गुप्तांग फड़के तो दूर की यात्रा पर जाना होता है। दाईं ओर का अंडकोष फड़के तो खोई वस्तु की प्राप्ति होती है, बाईं ओर का फड़के तो पुत्र से सुख और विदेश यात्रा का योग बनता है। दाहिनें पैर का तलवा फड़के तो कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, बाईं ओर का फड़के तो निश्चित रूप से यात्रा पर जाना होता है।
शनिवार, 20 मार्च 2010
पोलियो का ज्योतिषीय निदान
इस रोग के मूल में शनि को भी देखना चाहिए। ज्योतिषीय दृष्टि से इसके कारणों में शनि और उसकी राशियों मकर एवं कुंभ पर पाप ग्रह का प्रभाव होना है। उक्त राशियों में मौजूद चंद्रमा पर पाप दृष्टि हो, शनि यदि अस्तगत, नीचत्व प्राप्त हो व त्रिक्भाव में त्रिकेशों के साथ हो अथवा मेष राशि में पापी ग्रह हो तो पोलियो की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे जातक को विशेष रूप से पूर्वोपचार करना चाहिए। इसी प्रकार जातक की कुंडली के पांचवें, सातवें और ग्यारहवें भाव में पापी ग्रह भी इस रोग के सहायक हो सकते हैं।
कारण : पोलियो पीड़ितों की कुंडली देखने से प्रतीत होता है कि शनि अपनी नीच राशि मेष में आठवें भाव में स्थित है और त्रिकेश मंगल से भी पीड़ित है। चंद्रमा शनि की कुंभ राशि में राहु के साथ है और कोई शुभ दृष्टि नहीं होने से जातक आजीवन पोलियोजन्य त्रासदी भोगता है।
ज्योतिषीय परामर्श : पोलियोरोधी खुराक पिलाना सबसे उचित है। इसके अलावा जिसकी कुंडली में ऊपर दर्शाए गए ग्रह योग बने हों, उसके परिजनों और जिनको यह रोग हो चुका हो, उनको शनि व चंद्रमा की वस्तुओं का दान करना चाहिए। साथ ही इन ग्रहों के मंत्रों का जाप भी करना या करवाना चाहिए।
रोज शाम या रात्रि के समय महामृत्युंजय महामंत्र की एक माला करनी चाहिए। यह जाप ऊनी आसन पर बैठकर शिव आराधना के साथ करना बहुत प्रभावी माना गया है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में आया है कि दूध में लहसुन का प्रयोग करें। आधा किलो दूध में पांच कली लहसुन कूटकर डालें और तब तक उबालते रहें, जब तक कि दूध आधी कटोरी रह जाए। इसमें कुछ शक्कर डालकर पंद्रह दिनों तक सुबह पीने से लाभ मिलता है। यह प्रयोग शनिवार से करना चाहिए।
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पं. पुष्कर राज