सोमवार, 4 जनवरी 2010
भविष्यफल - जनवरी 2010
वृष ( TAURUS):- आजीविका और रोजगार के लिए यह महीना युवा जातकों के लिए भाग्योदयकारी होगा। रोजगार की तलाश पूरी होगी। हाल ही में शुरू किए गए व्यवसाय या छोटे स्तर की सेवा परियोजना से भी आमदनी के आसार नजर आएंगे। काई व्यक्ति आप पर भारी उपकार करेगा। इस महीने के उत्तरार्ध में आप कुछ विस्मयकारी घटनाओं के बीच अपने साहस को देखेंगे और किसी नए जीवन की वरदान राशि को लेकर चमत्कृत होंगे। अनेक महानुभाव अपने परिश्रम और चेष्टाओं के सिद्धकारक परिणाम भी महसूस करेंगे।
मिथुन ( GEMINI):- इस महीने का पहला हिस्सा भी शुभ गोचर से युक्त है। लाभकारी योजनाओं में धन लगाना उचित रहेगा। किसी मांगलिक कार्य या उत्सव में धन खर्च होगा। अच्छे स्वास्थ्य और स्फूर्ति के संचार होने से कष्टप्रद और जोखिम कार्य भी सरलता से बनते नजर आएंगे। बाद के हिस्से में सीनियर्स के प्रति जिम्मेदारियां पूरी होंगी। परन्तु कुछ जातकों का स्वास्थ्य बिगड़ जाने से उनके काम में बाधा आ सकती है। किसी कार्य विशेष के न बन पाने से पैसे की चिंता बनी रहेगी। सामाजिक क्षेत्रों में मान सम्मान की स्थिति यथावत बनी रहेगी। साल का पहला महीना कुछ रुकावटों के बाद भी सुख संतोष से बीत जाएगा।
कर्क ( CANCER):- इस महीने का पहला हिस्सा पत्नी , बेटे और भाइयों की ओर से कुछ आर्थिक संकट देने वाला होगा , फिर भी प्रभावशाली व्यक्ति और अच्छे सम्पर्क आपके काम आएंगे। बिजनस में आर्थिक स्थिति सुधरेगी। सुनियोजित कामों में समय पर लाभ होने लगेगा। महीने के दूसरे हिस्से में अच्छे संदेश और समाचार प्राप्त होंगे। उद्योग व्यापार को नई दिशा मिलेगी। काम बिगाड़ने वाले तत्व रोजमर्रा की जिंदगी से हट जाएंगे। निर्भय होकर आप अपने कामकाज को सफल बनाने में जुट जाएंगे।
सिंह ( LEO):- इस महीने का पहला हिस्सा काफी खर्च लेकर आएगा। शरीर में अचानक विकार या रोग पैदा हो सकते हैं। घर में मेहमान आदि के स्वागत में भी आडम्बरपूर्ण खर्च संभव है। आजीविका आदि में सहयोगियों के साथ तनाव और सीनियर अधिकारियों के बीच बहसबाजी से मान प्रतिष्ठा घट सकती है। इस महीने के दूसरे हिस्से में जब सूर्य आपकी छठी राशि पर संचार करेगा तो लोग आपके वक्तव्य को सत्य वचन कहकर स्वीकार कर लेंगे।
कन्या ( VIRGO) :- यह महीना अनुकूल वक्त और फायदों से भरपूर रहेगा। हालांकि स्वभाव में कुछ चंचलता आएगी , फिर भी आपके कहे गये शब्दों का सर्वत्र सम्मान होगा। आर्थिक पक्ष के अलावा आपका राजनीति दायरा भी इस बीच मजबूत होगा। जनमत और लोकमत के जरिए किसी प्रतिस्पर्धा में भी आप विजयी होंगे। इस महीने का दूसरा हिस्सा कुछ खर्चीला रहेगा और नुकसान भी करा सकता है।
तुला ( LIBRA):- इस महीने के आरंभ में विभिन्न प्रयासों , भरपूर परिश्रम और हितचिन्तकों के सहयोग से ही वांछित लाभ सम्भव होगा। एक साथ कई तरह के व्यापार या काम धन्धों में लाभ होगा। प्रतिस्पर्धा की दौड़ में आगे निकल जाएंगे। घर परिवार की व्यवस्था संतोषजनक रहेगी। विरोधियों और आलोचना करने वालों के मुंह बन्द रहेंगे। महीने का पिछला हिस्सा भी सुख सौभाग्य बढ़ाने वाला है।
वृश्चिक ( SCORPIO):- इस महीने के आरंभ में रुका धन प्राप्त होगा। नौकरी अथवा आजीविका में बदलाव की संभावना रहेगी। घर के दायरे में भी परिवर्तन की संभावना है। इस महीने के आखिरी हिस्से में निवेश किये गये धन का लाभ मिलेगा। बिजनस में तरक्की होगी। सज्जनों और सन्त महात्माओं के दर्शन लाभ करेंगे। बुजुर्गों और पैतृक संबंधों में सहयोग और प्रोत्साहन मिलेगा। किसी काम में मनोवांछित लाभ कुछ रुक - रुक कर होने से चिंताएं बढेंगी।
धनु ( SAGITTARIUS) :- इस महीने में गिरते कारोबार की ओर ध्यान दें। कार्य क्षेत्र की स्थिति असन्तोषजनक होगी। अधिकारी के व्यवहार से निराशा बढ़ेगी। पार्टनर के साथ वैचारिक मतभेद होगा। सुख में कमी होगी। मेहनत अधिक होगी। व्यस्तता बढ़ेगी। बौद्धिक श्रम बढ़ेगा। महीने के मध्य तक भाग्य साथ देगा। आत्मविश्वास से जिम्मेदारी पूरी कर सकेंगे। खर्च के कारण संतान के विवाह प्रस्तावों में निर्णय लेना कठिन हो सकता है। किसी व्यापारी मित्र से शत्रुता प्रतिष्ठा के लिए चुनौती बन जाएगी। परिश्रम से आय बढ़ेगी। धन - संग्रह होगा।
मकर ( CAPRICORN) :- इस महीने किसी मूल्यवान वस्तु के खर्च हो जाने से निराशा होगी। नये आदेश और काम का बोझ कष्टप्रद सिद्ध होगा। सम्भव है आजीविका बदलने का विचार बने। आपका व्यवहार खीझ भरा रहेगा। जो भी हो रहा है स्वयं को उससे अलग अनुभव करें। अपना ध्यान अन्य विषयों की ओर मोड़ देना ठीक होगा। बिजनस पार्टनर के व्यवहार में अप्रत्याशित बदलाव हो सकता है। सूझबूझ से स्थिति का लाभ उठाएं।
कुंभ ( AQUARIUS):- इस महीने का सम्पूर्ण भाग शक्तिशाली गोचर से युक्त है। देश विदेश की यात्रा या सम्पर्कों के माध्यम से आजीविका और व्यापार में उन्नति अर्जित करेंगे। समतुल्य लोगों में साख बढ़ेगी। किसी नये काम की प्रेरणा से धन और समय का निवेश भी सुनिश्चित होगा। परन्तु सूर्य प्रधान व्यक्ति आलस्य एवं दरिद्रता के शिकार होंगे। घर परिवार के बीच अनावश्यक झगड़े क्लेश आदि से खिन्नता होगी। इसी कारण धन की आवक भी समय पर नहीं हो पाएगी।
मीन ( PISCES) :- इस महीने का पहला हिस्सा व्यक्तिगत जीवन या कार्यक्षेत्र के विवादों को सुलझाने में बीतेगा। सहयोगी और मित्रों के काम और निष्ठा के प्रति शिकायत रहेगी। लापरवाही और अति विश्वास के कारण भी किसी प्रकार की हानि से आर्थिक कष्ट अनुभव करेंगे। सरकारी सर्विस से जुड़े हुए लोग उच्चाधिकारियों से विवाद बढ़ जाने के कारण चिंतित रहेंगे। महीने के दूसरे हिस्से में कार्यक्षेत्र और पराक्रम वृद्धि धीरे - धीरे सहायक होने लगेगी। विशेष प्रकार के कार्यभारों को निपटाने में सक्रियता रहेगी। घर - परिवार के बीच चिंता और अशांति का वातावरण छंट जाएगा।
पं0 केवल आनन्द जोशी
ज्योतिषाचार्य
राशियों पर शनि प्रभाव
कन्या : इस राशि को पूरे साल 2010 में लौह पाद से हृदय पर साढ़े साती रहेगी। उसके बाद पैरों पर उतरती साढ़ेसाती का प्रभाव रहेगा। अनेकों जातकों को स्वास्थ्य संबंधी कष्ट और आजीविका में उतार-चढ़ाव का दौर देखना पडे़गा। कामकाज में मन नहीं लगेगा। कुछ अच्छे कार्यों में धन का निवेश हो सकता है। संतान व मित्रों के लिए खर्च करना होगा। स्टूडेंट्स को परीक्षा, प्रतियोगिता में कठोर परिश्रम के उपरांत आंशिक सफलता मिलेगी। जो सज्जन पहले ही बुरे वक्त के दौर से गुजर चुके हैं, उनके जीवन में अब कुछ ठहराव की अपेक्षा रहेगी। चूंकि हृदय स्थान से शनि विचरण कर रहा है, अत: दिलोदिमाग को वश में रखकर नेक इरादे से आगे बढ़ने की चेष्टा करने से निस्सन्देह अभूतपूर्व सफलता भी अनेक कन्या जातकों को प्राप्त होगी। आर्थिक रूप से समृद्धि बढे़गी व खोया धन भी जमा खाते में दर्ज हो जाएगा।
तुला : पूरे साल सिर पर तांबे के पाए से चढ़ती हुई साढे़साती उन तमाम तुला जातकों पर रहेगी जो पिछले दो-ढाई वर्षों से जीवन में अनेक प्रकार के परिवर्तन महसूस कर रहे हैं। साल में यह ग्रह बारहवें भाव में रहकर जहां लोभ, लालच और अवांछित कार्यों से हानि पहुंचाएगा, वहीं मुकदमे, विवाद से भी धन व चैन की हानि होगी। निष्काम भाव से किए गए परोपकार का फल भी कभी-कभी उल्टा मिलेगा। शरीर में रोग, दुर्घटना या गुप्त पीड़ा से उपचार और दवा का खर्च बढे़गा। कुछ जातक बुरे समय के दौरान भी कहीं-कहीं पर अच्छा प्रभाव महसूस करेंगे। कोई जटिल कार्य सिद्ध हो जाएगा या किसी भारी संकट से मुक्ति मिलेगी।
वृश्चिक : जनवरी से दिसंबर के मध्य तक लाभ स्थान में गतिशील शनि स्वर्णपाद फल नेष्ट है। पूर्वापेक्षा में विशुद्ध लाभ कम होगा। आवश्यक, अनावश्यक झंझटों में धन का अपव्यय होगा। घर, गृहस्थी की समस्या का समाधान देर से होगा। जन्म कुंडली में शनि शुभ पड़ा हो तो थोड़ा लाभ होता है। भाग्य का सितारा चमकता है पर कष्ट भी देता है।
धनु : रजतपाद से भाग्य कुसमय दशम भाव में गतिशील शनि महाराज धनु राशि वालों के लिए व्यवधान कारक है। समय के स्वरूप को देखकर कार्य करें। शनि से जुड़े दानादि भी यथा शक्ति करते रहें। धन और स्वास्थ्य के लिए शनि अंततोगत्वा लाभदायक रहेगा। शुभ मांगलिक कार्यों में खर्च होगा।
मकर : मकर राशि वालों के नवम कर्म क्षेत्र में गतिशील शनि अप्रैल बाद तक लोहपाद श्रेष्ठ है। लाभोन्नति में आश्चर्यजनक बदलाव आएगा। विचाराधीन काम पूरा होगा। आराम प्राप्ति का नया रास्ता खुलेगा। सामाजिक मेलजोल बढे़गा। एकाध नुकसान होगा। पारिवारिक कलह, रोग, बीमारी में इलाज का खर्च बढ़ेगा। अकारण झगड़े विवाद होने से सम्मान को आंच आएगी। सामाजिक प्रतिष्ठा में घट-बढ़ रहेगी।
कुंभ : कुंभ राशि वालों में लघु कल्याणी ढैया मध्यम फलदायक है, बनते-बिगड़ते परिवेश में नए आयाम मिलेंगे। साथी से सचेत रहें। व्यवसाय में उतार-चढ़ाव रहेगा। विघ्न बाधाओं से घर परिवार के सदस्यों का रुख भी उलटा रहेगा। साल के अंत तक कुछ जीविका के साधन उपलबध होंगे और बिगड़े काम बनेंगे।
मीन : सप्तम शनि रजत पाद फल नेष्ट है। मीन राशि वालों को असामान्य विषम परिस्थितियों में से गुजरना पड़ेगा। बनते कार्यों में अड़चनें पैदा होंगी। स्वास्थ्य नरम रहेगा। चांदी का पाया होने से दांपत्य जीवन का सुख-दुख समान मिलेगा। पर्याप्त खर्च के बाद घर-गृहस्थी में उन्नति से हर्षोल्लास होगा। घूमने का अच्छा अवसर मिलेगा। चौपाया या सवारी से भय बना रहेगा।
मेष : पूरे साल तक मेष राशि को छठा शनि भ्रमण फल श्रेष्ठ लाभोन्नति में सहायक रहेगा। वर्ष में जमा खर्च का संतुलन बना रहेगा। पशुधन, भूमि, वाहनादि का लाभ मिलेगा। स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पडे़गा। अनेक जातकों को संघर्षपूर्ण हालात का सामना करना पड़ेगा। परिवार या व्यवसाय में उलझनें होंगी। ऋण और कर्ज बढ़ने की आशंका रहेगी। शत्रु भी सिर उठाएंगे। स्वास्थ्य बिगड़ने से मानसिक तनाव रहेगा।
वृष : पूरे वर्ष शनि पंचम भाव में लोहे के पाये से विचरण करेगा। स्टूडेंट्स को उच्च शिक्षा में बाधा आएगी। युवा जातकों को संतान कष्ट झेलना पड़ेगा। लोहे के पाये में शनि होने से पारिवारिक कलह दांपत्य जीवन में मनमुटाव व शत्रु, रोग और ऋण का दबाव बढ़ने से मानसिक अशांति बढ़ती रहेगी। उत्तरार्द्ध में समय श्री वृद्धि में सहायक रहेगा। अच्छी सोच समझ बनाने से भौतिक विकास व आर्थिक प्राप्ति का नया रास्ता खुलेगा। राजनैतिक क्षेत्र में भाग्य का सितारा चमकेगा। स्वास्थ्य कुछ गड़बड़ा जाएगा। सावधानी बरतें।
मिथुन : मिथुन राशि वालों के लिए शनि चौथे भाव से सोने के पाये में रहने से गतिशील शनि की लघु कल्याणी ढैया मध्यम फलदायक है। संघर्ष धन हानि और तनाव के बावजूद शुभ फल भी कभी-कभी उत्साहवर्धन करेंगे। जमीन, जायदाद और पारिवारिक मामलों में ज्यादा खर्च होने से आत्मग्लानि होगी। रोग और शत्रु से विवाद होने से खर्च बढ़ सकते हैं पर साल अंत तक कुछ उपलब्धियां होंगी।
कर्क : तृतीया यानी पराक्रम भाव में भ्रमणशील शनि ताम्रपाद फल नेष्ट है। खर्च की अभिवृद्धि मानसिक चिंता का कारण बनेगी। नए काम की रूपरेखा कठिनाई से सफल होगी। अच्छी व खराब दोनों किस्म की खबर मिलेगी। अधिकांश कर्क जातक जो व्यवसाय या नौकरी से जुड़े हैं, उन्हें कार्यों में सफलता मिलेगी। व्यापार में लाभ भी होगा व वाहन आदि की खरीद होगी पर बिना सोचे विचारे कुछ ऐसे काम भी होंगे जिनके लिए बाद में पश्चाताप हो।
शुक्रवार, 1 जनवरी 2010
वाहन हादसों से बचा सकता है वास्तु
भवन में सामान्यत: वायव्यकोण में वाहनों को रखना चाहिए। आजकल प्राय: भवन निर्माण के समय वाहन के लिए किसी भी एक दिशा में लम्बवत गलियारा छोड़ दिया जाता है और उसके साथ ही दरवाजा भी रख दिया जाता है। यहां यह ज्ञातव्य है कि गृहपति के आने-जाने के दरवाजे के अतिरिक्त वाहन के लिए अलग द्वार होना चाहिए। वास्तु विन्यास की परंपरा में ऐसा आवश्यक है। इसके लिए भवन के सामने के भाग की जो लम्बाई या चौड़ाई हो, उसको नौ भागों में बांट दें और प्राय: दोनों ओर से दो-दो खंडों को छोड़कर वाहन के लिए द्वार रखना चाहिए।
भवन में वायव्य कोण से लेकर नैऋत्य कोण की ओर की दीवार पर नौ-नौ भागों के अनुसार पहले दो और आखिरी दो खंड छोड़कर दरवाजा रखना बहुत शुभ माना जाता है। भवन का निर्माण कुछ इस तरह से किया जाना चाहिए कि वाहन एकदम उत्तरी दीवार के पास नहीं खड़ा रहे बल्कि उससे दो खंड की दूरी बनी रहे। वायव्यकोण के निकट, दीवार से आगे दो खंड छोड़कर दरवाजा रखने से परिवार में शोक और दु:ख की आशंका नहीं के बराबर रहती है जैसा कि वास्तुप्रदीप का मत है। ऐसे में तीसरे, चौथे खंड पर वाहन के लिए दरवाजा होना बहुत शुभ है। ऐसा होने पर वाहन संचालन में भी उचित समय पर उचित निर्णय होता है और भ्रम या चूक की संभावना नहीं के बराबर रहती है। यहां यह भी नियम है कि कभी वायव्य कोण से लगता हुआ कोई रेंप घर की सीमा से बाहर नहीं बनाए। हां, भवन के भीतर बनाया जा सकता है। बाहर बने रेंप से मतिभ्रम, व्यर्थ विवाद ऐसी स्थितियां देखने में आई हैं।
डॉ. श्रीकृष्ण जुगनू
मकर संक्रांति का त्योहार
उत्तर भारत :
हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में इस दिन तिल और खिचड़ी खाने की परंपरा है। लोग सुबह पहले पवित्र सरोवरों में स्नान करते हैं और धर्म स्थलों पर जाते हैं। पंजाब में यह त्योहार माघी के नाम से मनाया जाता है। इससे एक दिन पहले लोहड़ी का त्योहार होता है, जब रेवड़ी, मूंगफली और भुने हुए मक्के के दाने विशेष रूप से खाए और बांटे जाते हैं।
दक्षिण भारत :
कर्नाटक : लोग रंगीन कपड़े पहनकर मित्रों और रिश्तेदारों के घर जाते हैं। गन्ने, तिल की मिठाइयां, सूखा नारियल, मूंगफलियां और भुने हुए चने एक-दूसरे को देते हैं। इस दिन गाय-बैलों के सींग धोते और रंगते हैं। उन्हें फूल मालाओं से सजाया जाता है। रात को गीत-संगीत होता है। एक जगह आग लगाकर, जानवरों को आग पर से कुदाया जाता है।
तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश :
तेलुगू लोगों के लिए यह एक बड़ा पर्व है। वे इसे पेडा पंडुगा कहते हैं। यहां यह महोत्सव चार दिन चलता है। पहले दिन भोगी, दूसरे दिन संक्रांति, तीसरे दिन कणुमा और चौथे दिन मक्कणुमा कहलाता है।
पूर्व भारत :
पश्चिम बंगाल और बिहार में मकर संक्रांति को नदियों के तट पर स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। कोलकाता में हुगली नदी के किनारे गंगासागर मेला लगता है। देशभर से श्रद्धालु यहां इस दिन स्नान के लिए पहुंचते हैं। इस दिन का स्नान मोक्षदायक माना जाता है।
गुजरात, राजस्थान में उड़ती हैं पतंगें
पश्चिम भारत : महाराष्ट्र :
इस त्योहार पर लोग आपस में मिलते हैं और एक-दूसरे को मीठे रंगीन अनाज के दाने और भुने हुए तिल देते हैं, साथ ही गाते हैं-तिल गुड़ घया, गुड़-गुड़ बोला। अर्थात हमारे बीच अब मित्रता और अच्छे विचार पनपें।
गुजरात :
हिंदू गृहिणियां इस दिन नए बर्तन खरीदती हैं और उनका इस्तेमाल करती हैं। आकाश पतंगों से भर जाता है।
राजस्थान :
इस दिन पुष्कर में बड़ा मेला लगता है। पतंगें उड़ाई जाती हैं। शेष परंपराएं उत्तर भारत से ही मिलती-जुलती हैं।